फलाधिवास विधि – प्राण प्रतिष्ठा विधि
संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं फलाधिवासं करिष्ये ॥
प्राण प्रतिष्ठा में अधिवास संस्कार, देवता एवं प्रतिमा के अधिवास की विधि, सामग्री और मंत्रों से संबंधित जानकारी।
संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं फलाधिवासं करिष्ये ॥
संकल्प मंत्र : ॐ अद्यादि ……………………… प्रतिष्ठाङ्गगत्वेन प्रतिमासंशुद्ध्यर्थं ममगृहे प्रचुरधान्यपुत्र-पौत्रादिसुखसम्पत्यादि अभिवृद्धयर्थं पुष्पाधिवासं करिष्ये ॥
धान्याधिवास के उपरांत क्रमशः जो भी अन्य अधिवास करना हो करके स्नपन करे।
स्नपन के बाद पुरुष सुक्तादि से स्तुति करे।
सजाया हुआ रथ तैयार करे इन मंत्रों से प्रतिमाओं को उठाये :
किसी भी प्रतिमा में देवता की प्राण प्रतिष्ठा करने से प्रतिमा को कई प्रकार की वस्तुओं में अधिवास कराया जाता है जिनमें से तीन प्रमुख अधिवास माने गये हैं :
१. जलाधिवास, २. धान्याधिवास और ३. शय्याधिवास
“जलाधिवास” आलेख में प्राण-प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण अंग जलाधिवास के विषय में चर्चा करते हुए विधि और मंत्र बताया गया है। जलाधिवास का तात्पर्य शास्त्रीय विधि से एक निर्धारित समय तक जल में वास करना है। इससे प्राण प्रतिष्ठा करने की क्षमता बढ़ती है और दाहत्व का निवारण होता है। जलाधिवास करने की विधि में पूजा, मंत्र और संस्कारों का वर्णन किया गया है।