Pran Pratishtha

कर्मकांड में प्रतिमा का विशेष महत्व होता है जो घर में भी रखा जा सकता है किन्तु घर में छोटी प्रतिमा ही रखी जा सकती है बड़ी प्रतिमा के लिये मंदिर की आवश्यकता होती है और मंदिरों में बड़ी प्रतिमा के स्थापन की विशेष विधि होती है जिसे प्राण प्रतिष्ठा (Pran Pratishtha) कहा जाता है। इसमें प्राण प्रतिष्ठा की विस्तृत जानकारी व विधि और मंत्र दिये गये हैं।

Pran Pratishtha

रथयात्रा विधि – प्राण प्रतिष्ठा

अब हम रथयात्रा करने की विधि को समझेंगे। विभिन्न प्रतिष्ठा पद्धतियों में रथयात्रा विधि के सम्बन्ध में मौन भाव का आभासित होता है। तथापि कर्मकाण्ड विधि के द्वारा इस विषय में शास्त्र सम्मत विधियों के आलोक में मौन को भंग करने का प्रयास किया जा रहा है। इस विषय में आप अपना विचार मार्गदर्शन हमें प्रदान कर सकते हैं।

Pran Pratishtha

रथयात्रा – प्राण प्रतिष्ठा विधि

प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व एक विशेष महत्वपूर्ण विधि रथयात्रा है। जब किसी मंदिर में नई प्रतिमा स्थापित करनी होती है तो उस प्रतिमा को मंदिर में स्थापित करने से पूर्व सम्बंधित गांव/नगर में भ्रमण कराया जाता है जिसे रथयात्रा कहते हैं। इस आलेख में हम रथयात्रा विधि को समझने से पहले रथयात्रा के उचित समय को समझेंगे।

Pran Pratishtha

जलयात्रा विधान – शास्त्रोक्त विधि के अनुसार

जल यात्रा, धार्मिक आयोजन के रूप में सूचीत की जाती है। इसमें कुमारी कन्याओं और सौभाग्यवती स्त्रियों के साथ नदी या जलाशय से जल ग्रहण करके यात्रा करते हुए देवी-देवताओं के पूजन का कार्य होता है। इसके लिए शास्त्रों की विधि का पालन किया जाता है। यह एक पवित्र तीर्थ यात्रा के रूप में मानी जाती है।

Pran Pratishtha, प्रतिष्ठा

प्राण प्रतिष्ठा विधि – विधि-विधान की सम्पूर्ण जानकारी

इस आलेख में सर्व देव प्राण प्रतिष्ठा विधि की विस्तृत जानकारी दी गयी है। मातृकादि पूजन पूर्वक आरंभ, संकल्प मंत्र, जलयात्रा, नेत्रोन्मीलन, अग्न्युत्तारण, जलाधिवास, धान्याधिवास, शय्याधिवास, वेदी पूजन, हवन आदि सभी विषयों की विस्तृत विधि का वर्णन करते हुये सबके लिंक भी दिये गये हैं।

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